हर घर में प्रद्युम्न है
एनिमल प्लेनेट का एक सीन है | 'नू' का एक बच्चा शेर के चंगुल में फंस गया | उस 'नू' के बच्चे को शेर चाट रहा था और बाकि के 'नू' अपने बच्चों को चाट रहे थे | पिछले दिनों दिल्ली से सटे गुडगाँव के एक नामी-गिरामी इंटरनेशनल स्कूल में वो हुआ जो किसी बर्बर से बर्बर संस्था में भी न हुआ होगा | आये दिन प्राइवेट स्कूलों के बंद गेट के अन्दर से तरह-तरह की हरकतें सुनने को मिलती हैं | पर ऐसा तो कभी नहीं हुआ | अब बच्चे को न्याय दो, दोषी को पकड़ो, जेल में डालो, फांसी लगा दो जैसी वही पुराने ढर्रेदार बातें सुनने को मिल रही हैं | कोई कहता है हत्यारा दोषी, कोई कहे स्कूल | अब ये तो पुलिस बताएगी | मेरा कहना बड़ा साधारण है | भले हत्या किसी ने की हो, स्कूल कोई हो, प्रबंधन किसी का हो | समाज तो आपका है और ये सब समाज के अन्दर हुआ है तो जिम्मेदार आप भी हैं | और जिम्मेदारी इंडिया गेट पर कैंडल...