Incredible India को देखकर हैरान क्यों ?

Incredible India को देखकर हैरान क्यों ?

आज सुबह जब रोड पर निकला तो उड़ते-उड़ते बचा | जी हाँ, मरते-मरते नहीं, उड़ते-उड़ते, क्योंकि कारें उड़ा देती हैं | हुआ यूँ की मैं रोड के किनारे वाकिंग कर रहा था | अब हमारे रोड की जियोग्राफी तो आपको पता ही है | क्योंकि जो रोड पर रहते हैं और जो रोड पर नहीं रहते, सबका वक्त रोड पर ही गुजरता है | रोड पर सबसे किनारे दुकानें होती हैं, फिर ठेले खोमचे, कचरे के डब्बे, फिर अनेरिया बेल्ट होता है जिसमे गधे, कुत्ते,सूअर, गायें , भिखारी, पागल रहते हैं | उसके बाद चलने की जगह और फिर चलाने की जगह |तो मैं वाकिंग कर रहा था की अचानक मेरे बाएं से एक गाय जॉगिंग करते हुए गुजरी | मैं छलकट पैंतरे के साथ दायीं ओर खिसका की सन्न से एक कार निकल गई | सो उड़ते-उड़ते बचा | गायें और कारें, दोनों उड़ा देती हैं; ये अलग बात है की आदमी मर जाता है |आज मेरा उड़ना तय था | भाग्यशाली था, बच गया | आप खुश होते होंगे भाग्यशाली होने पर, पर मैं खुश नहीं होता | कुढ़ता हूँ..."साला, रोजमर्रा के काम में भी भाग्य का सहारा  |" कुढ़ते-कुढ़ते घर पहुंचा |

अख़बार उठाया तो मिस्टर केविन से भेंट हो गयी | कुढ़े हुए मुद्रा में मुझसे पहले से खड़े थे | मिस्टर केविन डूरेंट ....अमेरिका के मशहूर बास्केटबाल खिलाड़ी 'टोकरी में गेंद फेंकने में माहिर'| मैंने खबर पढ़ना शुरू किया |kevin durant
"अमेरिका के मशहूर बास्केटबाल खिलाड़ी केविन डूरेंट भारत आये थे | अपनी भारत यात्रा के दौरान उन्होंने कहा की ये देश ज्ञान और अनुभवों के मामले में 20 साल  पीछे है | NBA के स्टार खिलाड़ी डूरेंट ने कहा की उनकी भारत यात्रा काफी विचित्र रही |उन्होंने कहा की यहाँ गलियों में गाय दिखती है, बन्दर दीखते हैं , आवारा कुत्ते घूमते दिख रहे हैं |लाखों लोग सड़क किनारे चलते हैं | गाड़ियाँ दौड़ती हैं फिर भी ट्राफिक नियमों का उल्लंघन नहीं होता | यहाँ रास्ते के बीच मिट्टी पड़ी है, घर अधूरे बने हैं, न खिड़कियाँ हैं न दरवाजे |फिर अचानक से सामने ताजमहल आ जाता  है | ये बातें मुझे हैरान करती हैं | भारत यात्रा के अपने पुरे अनुभव के बारे में डूरेंट ने कहा की मैंने सोचा था की भारत में अलग-अलग जगह घुमुंगा जहाँ मुझे रोचक जीवनशैली और सोने से सजी चीजें दिखेंगी | लेकिन यहाँ पहुंचकर जब मैंने लोगों की संस्कृति और रहन-सहन को देखा तो समझ  आया की ये सब कितना संघर्षपूर्ण है | मेरा अनुभव काफी विचित्र रहा |"

अब मेरा माथा ठनका | श्री केविन डूरेंट महोदय आप क्या बोल रहे हैं ? भारत आने से पहले आपको पता होना चाहिए था की  भारत, लोगों और गायों के मामले में विश्व  में दुसरे स्थान पर है |तो रोड पर  लोग और गाय न दिखे तो क्या दिखे |आप incredible India देखने आये थे सो, आपको  दिखाया हमने | आखिर, incredible चीजें देखकर हैरानी ही तो होती है, सो आपको हुई | आपको हैरानी न होती, विचित्रता का अनुभव न होता तो क्या हम  incredible कहलाते ? इसलिए टोकरी में गेंद फेंकने में माहिर  महोदय, नाराज मत होइये | सवाल मत उठाइये, आपने जो 'काफी विचित्रता' का अनुभव किया है उसका पूरा लुत्फ़ उठाइये | और अंत में अपने देशवासियों से कहूँगा की, "सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा  में' 'सर्वे संतु   सुखिनः सर्वे संतु निरामया:' का सिद्धांत लागू है, सो रोड पर गाय...बन्दर...कुत्ते...घुमाते रहिये और Incredible India देखने आये लोगों को यूँ ही हैरान करते रहिये |
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